अरे चन्दा !
तेरी निरमल कहिए चाँदनी,
राजा की बेटी पानी नीकरी
अरे कुँअटा! तेरे ऊँचे-नीचे घाट रे,
जा ऊपर धोवै छोरा धोवती
अरे छोरा! तू मारू बैंगन तोरिला
जौं लौ मैं धोऊँ तेरी धोवती
अरे छोरी! तेरे गोबर लिसरे हाथ रे,
दाग लगैगो मेरी धोवती
अरे छोरा!
मेरे मेंहदी रचि रहे हाथ रे,
रंग चुयेगी तेरी धोवती
अरे छोरा! तू मन को बड़ो मलूक रे,
इत्ते बड़े पै क्वाँरो चौं रह्यौ ?
अरे छोरी!
मेरे मरि गए माई बाप रे,
भैया भरोसे क्वाँरे हम रहे
अरे छोरी!
तू मन की बड़ी मलूक री,
इतनी बड़ी तौ क्वाँरी चौं रही?
अरे छोरा! वर देखे देश-विदेश में,
मेरी जोड़ी को वर ना मिल्यौ
अरे छोरी! चल चल तू सोरों घाट री,
ह्वाँ चलिके डारें दोनों भाँवरी
अरे छोरा! वहाँ बहुत जुरैंगे लोग रे,
मोहि तो आवै देखौ लाज री।
ब्रजभाषा का एक लोकप्रिय लोक गीत
welcome......likhte rahiye...aisi hi achhi rachnaye...
ReplyDeleteमेरे हिन्दी अध्यापक ब्रजभाषा के माधुर्य का यह उदाहरण दिया करते थे' "माई री मोहिं साँकरी गरी में काँकरी गरत हौ"।
ReplyDeleteआशा है आप ऐसी ही मधुर रचनाएँ पठाते रहे
गें। शुभकामनाएँ।
यदि word verification का झंझट रखा हो तो हटा दें बहुत कष्ट देता है।
आनंद..अनोखी सी तृप्ति...
ReplyDeleteक्या खूब संवाद...
छोरा अउर छोरी, डा़रे दोनो भांवरी.
ReplyDeleteऔर लोकगीतों की प्रतीक्षा रहेगी।
good. narayan narayan
ReplyDeleteaccha hai
ReplyDeleteप्रिय बहन
ReplyDeleteजय हिंद
लोकगीत बहुत अच्छा लगा
अगर आप अपने अन्नदाता किसानों और धरती माँ का कर्ज उतारना चाहते हैं तो कृपया मेरासमस्त पर पधारिये और जानकारियों का खुद भी लाभ उठाएं तथा किसानों एवं रोगियों को भी लाभान्वित करें
आज आपका ब्लॉग देखा..... अच्छा लगा. मेरी कामना है की आपके शब्दों को नयी ऊर्जा मिले जिससे वे जन-सरोकारों की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बन सकें..
ReplyDeleteकभी समय निकाल कर मेरे ब्लॉग पर भी आयें :-
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सादर-
आनंदकृष्ण, जबलपुर
मोबाइल : 09425800818
बहुत खूब
ReplyDeletewaah bhai waah!
ReplyDeleteजब भी कोई बात डंके पे कही जाती है
ReplyDeleteन जाने क्यों ज़माने को अख़र जाती है ।
झूठ कहते हैं तो मुज़रिम करार देते हैं
सच कहते हैं तो बगा़वत कि बू आती है ।
फर्क कुछ भी नहीं अमीरी और ग़रीबी में
अमीरी रोती है ग़रीबी मुस्कुराती है ।
अम्मा ! मुझे चाँद नही बस एक रोटी चाहिऐ
बिटिया ग़रीब की रह – रहकर बुदबुदाती है
‘दीपक’ सो गई फुटपाथ पर थककर मेहनत
इधर नींद कि खा़तिर हवेली छ्टपटाती है ।
@Kavi Deepak Sharma
http://www.kavideepaksharma.co.in
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http://shayardeepaksharma.blogspot.com
namaskar mitr,
ReplyDeleteaapki saari posts padhi , aapki kavitao me jo bhaav abhivyakt hote hai ..wo bahut gahre hote hai .. aapko dil se badhai ..
meri nayi kavita " tera chale jaana " aapke pyaar aur aashirwad ki raah dekh rahi hai .. aapse nivedan hai ki padhkar mera hausala badhayen..
http://poemsofvijay.blogspot.com/2009/05/blog-post_18.html
aapka
Vijay
आपकी इस रचना के बारे में क्या कहूं.......
ReplyDeleteबहुत ही उक्रष्ट रचना है.....
बहुत ही अच्छे भावः प्रकट किये हैं आपने.......
अक्षय-मन
sundar
ReplyDeleteबहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
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